स्वाभिमानी व्यक्ति आनन्दित रहता है
स्वाभिमानी बनें, अभिमानी नहीं। स्वाभिमानी व्यक्ति आनन्दित रहता है, और अभिमानी तो सदा शोक सागर में ही डूबा रहता है। क्या अंतर है, स्वाभिमान और अभिमान में? स्वाभिमान का अर्थ है - ईश्वर ने आपको जितनी विद्या बल बुद्धि शक्ति सामर्थ्य आदि दिया है, अपने पास उतना ही मान कर चलें। उसी के आधार पर लोगों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करें, और अपनी वास्तविक योग्यता के आधार पर, समाज के लोगों से, उचित धन सम्मान प्राप्ति की इच्छा करें। इसका नाम है स्वाभिमान. और ईश्वर की दी हुई आपके पास जितनी विद्या बुद्धि बल धन योग्यता आदि वस्तुएं वास्तव में हैं, अपने पास उससे कई गुना अधिक मानना, अनेक क्षेत्रों में अनधिकार चेष्टाएँ करना, योग्यता से अधिक धन सम्मान की इच्छा करना, और अपनी योग्यता अधिक मानकर लोगों पर अनुचित दबाव डालना, उनके साथ लड़ाई झगड़े करना, झूठ छल कपट का प्रयोग करके न्याय के विरुद्ध आचरण करना, सब जगह अपनी मनमानी करना, दूसरों का शोषण करना आदि, ये सब अभिमान के लक्षण हैं। ईश्वर स्वाभिमानी व्यक्ति पर, ...