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स्वाभिमानी व्यक्ति आनन्दित रहता है

 स्वाभिमानी बनें, अभिमानी नहीं।  स्वाभिमानी व्यक्ति आनन्दित रहता है, और  अभिमानी तो सदा शोक सागर में ही डूबा रहता है।        क्या अंतर है, स्वाभिमान और अभिमान में? स्वाभिमान का अर्थ है - ईश्वर ने आपको जितनी विद्या बल बुद्धि शक्ति सामर्थ्य आदि दिया है, अपने पास उतना ही मान कर चलें। उसी के आधार पर लोगों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करें, और अपनी वास्तविक योग्यता के आधार पर, समाज के लोगों से, उचित धन सम्मान प्राप्ति की इच्छा करें। इसका नाम है स्वाभिमान.       और ईश्वर की दी हुई आपके पास  जितनी विद्या बुद्धि बल धन योग्यता आदि वस्तुएं वास्तव में हैं, अपने पास उससे कई गुना अधिक मानना, अनेक क्षेत्रों में अनधिकार चेष्टाएँ करना, योग्यता से अधिक धन सम्मान की इच्छा करना, और अपनी योग्यता अधिक मानकर लोगों पर अनुचित दबाव डालना, उनके साथ लड़ाई झगड़े करना, झूठ छल कपट का प्रयोग करके न्याय के विरुद्ध आचरण करना, सब जगह अपनी मनमानी करना, दूसरों का शोषण करना आदि, ये सब अभिमान के लक्षण हैं।         ईश्वर स्वाभिमानी व्यक्ति पर, ...

आज का संकल्प पाठ

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 ओ३म् सादर नमस्ते जी  आपका दिन शुभ हो    दिनांक  - - १६  सितम्बर २०२० दिन  - - बुधवार  तिथि - - चतुर्दशी  नक्षत्र - - मघा  पक्ष - - कृष्ण  माह  - - आश्विन  ऋतु  - - शरद  सूर्य  - - दक्षिणायण  सृष्टि संवत्  - - १,९६,०८,५३,१२१ कलयुगाब्द  - - ५१२१ विक्रम संवत्  - - २०७७ शक संवत्  - - १९४२ दयानंदाब्द - - १९६        ओ३म्       मनुष्य कई प्रकार के नशों का पान करता है, भंग, शराब, गांजा, अफीम आदि का सेवन करता है उससे मनुष्य को एक प्रकार का नशा प्राप्त होता है जो उसके नाश करने वाला होता है।प्रभु भक्ति भी एक नशा है जिसके सेवन करने से नाश या ह्रास नही अपितु उसका विकास होने लगता है। मानव उन्नति की ओर अग्रसर होने लगता है। भक्ति रूपी सोम रस के पान से क्या मिलता है इसका वर्णन इस प्रकार किया है।        वह भगवान अमर है, न मरने वाला है।जो उसकी भक्ति करता है वह भी अमर हो जाता है, मृत्यु के भय से रहित हो जाता है, उसे किसी...

मनुष्य कई प्रकार के नशों का पान करता है

 मनुष्य कई प्रकार के नशों का पान करता है, भंग, शराब, गांजा, अफीम आदि का सेवन करता है उससे मनुष्य को एक प्रकार का नशा प्राप्त होता है जो उसके नाश करने वाला होता है।प्रभु भक्ति भी एक नशा है जिसके सेवन करने से नाश या ह्रास नही अपितु उसका विकास होने लगता है। मानव उन्नति की ओर अग्रसर होने लगता है। भक्ति रूपी सोम रस के पान से क्या मिलता है इसका वर्णन इस प्रकार किया है।      वह भगवान अमर है, न मरने वाला है।जो उसकी भक्ति करता है वह भी अमर हो जाता है, मृत्यु के भय से रहित हो जाता है, उसे किसी प्रकार का कोई भय भयभीत नही कर सकता ।        भक्ति रस का पान करके मनुष्य आनन्दमय हो जाता है । वह परमानंद का अनुभव करने लगता है जिसमें दुःख नही, शोक नही, राग नही, द्वेष नही, मस्ती ही मस्ती है न हटने वाली मस्ती है ।     भक्ति रस का पान करने से मानव के समीप देवों का सतपुरूषो का आगमन होने लगता है।गुणी ज्ञानी लोगों का उसके पास एक ऐसा मेला सा लगा रहता है। जिससे स्वतः उसे सत्संगति प्राप्त होने लगती है।      भक्त के सभी प्रकार के आन्तरिक तथा  बाहय...

आज का वेद मंत्र

 आज का वेद मंत्र  ओ३म् स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा: स्वस्ति न पूषा विश्ववेदा: । स्वस्ति नस्तार्क्ष्योऽअरिष्नेमि: स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ( यजुर्वेद २५|१९) अर्थ :-  बहुत सुनने वाला वा बहुत कीर्ति वाला परमैश्वर्यवान् प्रभु हमें कल्याण प्रदान करें । पुष्टिकर्त्ता- सर्वज्ञाता ईश्वर हमारे लिए कल्याण की वर्षा करें ।तेजस्वी दुःखहर्त्ता परमेश्वर हमें आनन्द देवें ।बड़े बड़े महान् पदार्थों का पति परमेश्वर हमारे लिए कल्याणकारी हो। smelan, marriage buero for all hindu cast, love marigge , intercast marriage , arranged mar arayasamaj sanchar nagar 9977987777

आज का चिन्तन

 आज का चिन्तन   पानी को कितना भी गर्म कर लें पर वह थोड़ी देर बाद अपने मूल स्वभाव में आकर शीतल हो जायेगा। इसी प्रकार हम कितने भी क्रोध में, भय में अशांति में रह लें थोड़ी देर बाद बोध में, निर्भयता में और प्रसन्नता में हमें आना होगा क्योंकि यही हमारा मूल स्वभाव है। 🌹 इतना ऊर्जा सम्पन्न जीवन परमात्मा ने हमें दिया है स्वयं का तो क्या लाखों-लाखों लोगों का कल्याण करने के निमित्त भी हम बन सकते है। जरुरत है स्वयं की शक्ति और स्वभाव समझने की।  🌹सबसे बड़ी अगर जीवन पथ में अगर कोई बाधा है तो वह है निराशा। हम थोड़ी देर में ही परिस्थिति के आगे घुटने टेककर उसे अपने ऊपर हावी कर लेते हैं। किसी संग दोष के कारण, किन्ही बातों के प्रभाव में आकर निराश हो जाना, यह संयोग जन्य स्थिति है। आनंद , प्रसन्नता, उत्साह, उल्लास और सात्विकता मूल स्वभाव तो हमारा यही ही है। smelan, marriage buero for all hindu cast, love marigge , intercast marriage , arranged mar arayasamaj sanchar nagar 9977987777

आज का संकल्प पाठ

 ओ३म् सादर नमस्ते जी  आपका दिन शुभ हो  दिनांक  - - १५ सितम्बर २०२० दिन  - - मंगलवार तिथि - - त्रयोदशी  नक्षत्र - - आश्लेषा  पक्ष - - कृष्ण  माह  - - आश्विन  ऋतु  - - शरद  सूर्य  - - दक्षिणायण  सृष्टि संवत्  - - १,९६,०८,५३,१२१ कलयुगाब्द  - - ५१२१ विक्रम संवत्  - - २०७७ शक संवत्  - - १९४२ दयानंदाब्द - - १९६  ओ३म्  भारत को आखिर बॉलीवुड ने दिया क्या है? ====================    १. बलात्कार गैंग रेप करने के तरीके।    २. विवाह किये बिना लड़का- लड़की का शारीरिक सम्बन्ध बनाना।   ३.) विवाह के दौरान लड़की को मंडप से भगाना   ४.) चोरी,डकैती करने की विधि।    ५.) भारतीय संस्कारों का उपहास उड़ाना।   ६.) लड़कियों को छोटे कपड़े पहनने की सीख देना....जिसे फैशन का नाम देना।   ७.) दारू सिगरेट,चरस,गांजा कैसे पिया और लाया जाये।   ८.) गुंडागर्दी कर के हफ्ता वसूली करना।   ९.) भगवान का मजाक बनाना और अपमानित करना।   १०.) पूजा- पाठ ,यज्ञ करना पाखण्ड है ...

मनुष्य जीवन अच्छी प्रकार से नहीं चल पाता

 उदारता विश्वास आदि ऐसे गुण हैं,  जिनके बिना मनुष्य जीवन अच्छी प्रकार से नहीं चल पाता।         एक अच्छा जीवन जीने के लिए यह आवश्यक है, कि व्यक्ति में उदारता का गुण होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति गरीब कमजोर जरूरतमंद हो, उसे देखकर भी यदि हम उसकी सहायता नहीं करते; या कोई व्यक्ति समाज सेवक परोपकारी दान का पात्र हो, और हम उसे दान नहीं देते, तो हमारे पास ईश्वर की दी हुई जो धन बल ज्ञान विद्या आदि संपत्तियाँ हैं, वे सब व्यर्थ हैं। उनका क्या लाभ? आवश्यकता से अधिक संपत्तियाँ  होती ही इसीलिए हैं, कि हम उनसे दूसरों की सहायता करें।       ईश्वर ने हमें स्वार्थी बनकर जीने के लिए संसार में नहीं भेजा है। हमारे पास जो भी धन बल विद्या आदि  संपत्तियाँ हैं, वे हमारी नहीं हैं, ईश्वर की दी हुई हैं। ईश्वर की न्याय व्यवस्था से मिली हैं।           वे  संपत्तियाँ ईश्वर ने इसीलिए दी हैं, कि हम उन संपत्तियों से अपना जीवन भी ठीक प्रकार से जिएं। और जो संपत्तियाँ हमारी आवश्यकता से अधिक हमारे पास हैं, उनका दूसरों की सहायता में भी प्र...