"विद्या का जीवन में क्या महत्व है?
आचार्य करणसिह नोएडा
"विद्या का जीवन में क्या महत्व है?"
श्लोक--
विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं, प्रच्छन्नगुप्तं धनं, विद्या भोगकरी यशः सुखकरी,विद्या गुरुणाम् गुरु:।
विद्या बंधुजनों विदेश गमने, विद्या परा देवता,विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं,विद्याविहीनःपशु:।।नीति,२०
भावार्थ-
विद्या मनुष्य का महत्व वर्धक असली सौंदर्य है,और छिपा हुआ सुरक्षित धन है, विद्या भोगो को देने वाली और कीर्ति तथा सुख को उत्पन्न करने वाली है।विद्या गुरुओं का भी गुरु है। विदेश में विद्या ही बंधु है, और विद्या परम देवता है,विद्या ही राजाओं के यहां आदर पाती है,धन नहीं अतःविद्या से रहित मनुष्य पशु के समान है। अतः हमें विद्या अवश्य प्राप्त करनी चाहिए विद्या से ही व्यक्ति को सर्वत्र सम्मान मिलता है।
"विद्या से प्रीत"
विद्या तू आ जा, मेरी संगनी बन साथ निभा जा।
विद्या तेरे बिन नहीं, मेरा सत्कार तू ही है मेरा जीवनाधार।।१।।
विद्या तुझे मै मन से चाहता हूं, तू मुझे चाहने का दे अधिकार।
विद्या मेरे जीवन में खुशियां भर दे, देकर अपना प्यार।।२।।
विद्या तुम मुझे अपना लो, मत करो मेरा तिरस्कार।
विद्या तुमको पाकर ही मिटेगा, मेरे मन का अंधकार ।।३।।
विद्या जिस जिस ने तुझे अपनाया, तुमने देकर साथ उसे आगे ही बढ़ाया।
विद्या मैंने भी तुम्हें अपना कर, अपने बल पौरूष को चमकाया।।४।।
विद्या में तप जितना किया पुरुषार्थ, उतना ही फल मिला उसको निस्वार्थ। विद्या पाने में जो तप श्रम जितना करता, उसका उतना ही बढ़ता बल पुरुषार्थ।। ५।।
फैशन रूप रंग सब बेकार, यदि मानव विद्या से न किया तुमने प्यार।
आचार्य करण जगत् में विद्या से ही, सर्वत्र सबको मिलता है सत्कार।।६।
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